Bharat Bandh: एक दिन के भारत बंद से देश को कितना होता है नुकसान? जानिए आर्थिक असर

नई दिल्ली – जब देशव्यापी भारत बंद की घोषणा होती है, तो उसका असर केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी साफ नजर आता है। चाहे वह ट्रेड यूनियन की हड़ताल हो, किसान आंदोलन हो या फिर विपक्षी दलों द्वारा बुलाया गया बंद — इसका व्यापक असर परिवहन, व्यापार, उद्योग, और आम जनजीवन पर पड़ता है।

एक दिन का भारत बंद: कितना होता है आर्थिक नुकसान?

विशेषज्ञों के अनुसार, एक दिन के भारत बंद से देश को औसतन 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। यह आंकड़ा विभिन्न सेक्टरों में उत्पादन रुकने, कारोबार ठप होने और सेवाओं के बाधित होने के कारण होता है।

कौन-कौन से सेक्टर होते हैं सबसे अधिक प्रभावित?

  1. परिवहन: बस, ट्रेन, टैक्सी, ट्रक और ऑटो सेवाएं रुक जाती हैं, जिससे सप्लाई चेन बाधित होती है।
  2. व्यापार और उद्योग: बाजार बंद होने से खुदरा और थोक व्यापारी करोड़ों का नुकसान झेलते हैं।
  3. बैंकिंग और सेवाएं: बैंकिंग, बीमा और अन्य सेवाएं बंद होने से आम आदमी की परेशानी बढ़ती है।
  4. पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी: होटल, ट्रैवल और टूर ऑपरेटर सेक्टर भी प्रभावित होते हैं।

किस आधार पर होता है नुकसान का अनुमान?

  • GDP का दैनिक हिस्सा: भारत की GDP करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर है, और यदि इसे 365 दिनों में विभाजित करें, तो प्रति दिन लगभग 85,000 करोड़ रुपये का आर्थिक मूल्य बनता है।
  • यदि इसमें से 10-15% गतिविधियां बाधित होती हैं, तो 8,000 से 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान संभव है।

बंद और लोकतांत्रिक अधिकार

भारत में बंद एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके आर्थिक दुष्परिणाम और आम जनता की परेशानियां अक्सर बहस का विषय बनते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार टिप्पणी की है कि बंद के नाम पर आम जनजीवन को बाधित करना संविधान की भावना के विपरीत है।

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