समस्तीपुर: जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि ऑनलाइन और डिजिटल प्रक्रिया के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े कामों में बिचौलियों की सक्रियता कम होने के बजाय बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि जमीन खरीद-बिक्री करने वाले लोगों से विभिन्न स्तरों पर अतिरिक्त पैसे की मांग की जाती है और प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर उन्हें परेशान किया जाता है।

पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था का उद्देश्य जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और कम समय लेने वाला बनाना है। इसमें दस्तावेजों को डिजिटल तरीके से तैयार करने और प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। हालांकि, व्यवस्था लागू होने के बाद भी जमीन से जुड़े मामलों में बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है।

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले कई लोगों को तकनीकी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में बिचौलिये खुद को प्रक्रिया का जानकार बताकर लोगों से संपर्क करते हैं और दस्तावेज तैयार कराने से लेकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराने तक के नाम पर अतिरिक्त रकम वसूलते हैं।

कुछ मामलों में जमीन के दस्तावेजों में जानकारी दर्ज करने, ऑनलाइन आवेदन, स्टांप शुल्क, निबंधन शुल्क और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर लोगों को भ्रमित किए जाने की भी शिकायत सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इसी भ्रम का फायदा उठाकर बिचौलिये जमीन मालिकों और खरीदारों से मनमानी रकम वसूल रहे हैं।

यह भी पढ़ें  शिक्षा, रोजगार और पलायन-मुक्त मिथिला के संकल्प के साथ डॉ. धर्मांश रंजन ने MLC प्रत्याशी के रूप में दाखिल किया नामांकन

पेपरलेस रजिस्ट्री में दस्तावेजों की डिजिटल प्रक्रिया होने के बावजूद यदि किसी स्तर पर गलत जानकारी दर्ज की जाती है या दस्तावेजों में हेराफेरी होती है तो इसका सीधा असर जमीन मालिक और खरीदार पर पड़ सकता है। ऐसे में जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों के लिए दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करना और किसी भी व्यक्ति के कहने मात्र पर कागजात पर हस्ताक्षर नहीं करना बेहद जरूरी है।

जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों का कहना है कि प्रक्रिया को सरल बनाने के बावजूद आम लोगों के लिए तकनीकी औपचारिकताएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। इसी का फायदा उठाकर बिचौलिये सक्रिय रहते हैं। ऐसे में निबंधन कार्यालय परिसर और उसके आसपास अनधिकृत रूप से सक्रिय लोगों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

जानकारों का कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री से पहले संबंधित भूमि के स्वामित्व, दस्तावेज, जमाबंदी, खाता-खेसरा और अन्य जरूरी रिकॉर्ड की जांच कर लेना चाहिए। साथ ही रजिस्ट्री के दौरान निर्धारित सरकारी शुल्क की जानकारी आधिकारिक माध्यम से प्राप्त करनी चाहिए, ताकि किसी बिचौलिए द्वारा अतिरिक्त रकम की मांग किए जाने पर उसका सत्यापन किया जा सके।

पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को वास्तव में पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है कि आम लोगों को पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए और बिचौलियों की भूमिका पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। यदि जमीन रजिस्ट्री के नाम पर किसी तरह की हेराफेरी या अवैध वसूली की शिकायत मिलती है तो संबंधित विभाग द्वारा उसकी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *