Samastipur News: समस्तीपुर नगर निगम की दुकानों से मिलने वाला किराया पिछले करीब तीन वर्षों से अटका हुआ है। किराया वसूली की प्रक्रिया में पेंच फंसने के कारण नगर निगम का करीब 60 लाख रुपये का राजस्व बकाया हो गया है। नगर निगम की ओर से किराया दर में संशोधन किए जाने के बाद से यह मामला लगातार लंबित चल रहा है।

नगर निगम की 130 दुकानों से जुड़ा है मामला

समस्तीपुर शहर में नगर निगम की अलग-अलग जगहों पर करीब 130 दुकानें हैं। इन दुकानों से नगर निगम को नियमित रूप से किराये के रूप में राजस्व प्राप्त होता था। पहले दुकानदारों से करीब 12 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से किराया लिया जाता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब तीन साल पहले किराये की दर को संशोधित करते हुए इसे 35 रुपये प्रति वर्गफीट कर दिया गया। इस संशोधित दर को नगर निगम बोर्ड से भी पारित कराया गया था। हालांकि, दुकानदारों की ओर से नई दर पर सहमति नहीं बनने के कारण किराया वसूली की प्रक्रिया प्रभावित हो गई।

पुराने किराये की दर से भुगतान करना चाहते हैं दुकानदार

दुकानदारों का कहना है कि वे पुराने निर्धारित किराये की दर से बकाया राशि जमा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन संशोधित दर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण नगर निगम का कर कार्यालय पुराने दर पर किराया स्वीकार नहीं कर रहा है।

इसका सीधा असर राजस्व वसूली पर पड़ा है। पिछले करीब तीन वर्षों से दुकानों में कारोबार जारी है, लेकिन किराये की राशि नियमित रूप से नगर निगम के खाते में जमा नहीं हो पा रही है। इससे एक ओर निगम का राजस्व अटक गया है, वहीं दूसरी ओर दुकानदारों पर भी बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है।

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इन जगहों पर हैं नगर निगम की दुकानें

नगर निगम की कई दुकानें शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित हैं। इनमें पुराने नगर परिषद भवन के नीचे, नगर निगम के प्रशासनिक कार्यालय भवन के नीचे, कलेक्ट्रेट के आसपास और राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में स्थित मार्केट शामिल हैं।

इन दुकानों से मिलने वाला किराया नगर निगम के नियमित राजस्व का हिस्सा है। किराया वसूली में लंबे समय से बनी स्थिति के कारण निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

बैठक कर समाधान निकालने की मांग

दुकानदारों की ओर से इस मामले का समाधान निकालने के लिए बैठक बुलाने की मांग की गई है। दुकानदारों का कहना है कि किराया दर को लेकर जो भी पेंच है, उसे बातचीत के जरिए दूर किया जाना चाहिए, ताकि बकाया राशि जमा हो सके और नगर निगम को भी नियमित राजस्व मिलना शुरू हो।

कुछ दुकानदारों द्वारा किराये की बकाया राशि में कुछ भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, किराया दर को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण पूरी वसूली प्रक्रिया सामान्य नहीं हो सकी है।

तीन साल से लंबित मामले से बढ़ रहा बकाया

करीब तीन वर्षों से किराया वसूली प्रभावित रहने के कारण बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है। यदि समय रहते किराया वसूली की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता है तो नगर निगम का बकाया राजस्व और बढ़ सकता है।

फिलहाल दुकानदारों और नगर निगम के बीच किराया दर को लेकर स्थिति स्पष्ट होने और बकाया राशि की वसूली शुरू होने का इंतजार है। मामले के समाधान के बाद नगर निगम को लंबे समय से अटके राजस्व की वसूली का रास्ता साफ हो सकता है।

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