पटना: बिहार में मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत निजी एंबुलेंस को भी सरकारी आपातकालीन सेवा नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों और उनके परिजनों को उपलब्धता के आधार पर सरकारी या निजी एंबुलेंस चुनने का विकल्प मिल सकता है। इसका उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली देरी कम करना और एंबुलेंस की उपलब्धता बढ़ाना है। 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग राज्य में निजी एंबुलेंस की जानकारी जुटाने और उनकी मैपिंग कराने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। इसके बाद निजी एंबुलेंस को 102 और 112 आपातकालीन सेवाओं से जोड़ने की तैयारी है। हालांकि, यह व्यवस्था अभी प्रस्तावित है और इसके लागू होने की अंतिम तारीख तथा विस्तृत नियमों की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। 102 और 112 सेवा से जुड़ेंगी निजी एंबुलेंस बिहार में फिलहाल सरकारी एंबुलेंस सेवाओं के माध्यम से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की सुविधा दी जाती है। प्रस्तावित व्यवस्था में निजी एंबुलेंस को भी इस नेटवर्क में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इससे आपातकालीन कॉल सेंटर के पास सरकारी वाहनों के साथ उपलब्ध निजी एंबुलेंस की जानकारी भी हो सकेगी। इस व्यवस्था के तहत मरीज की लोकेशन और एंबुलेंस की उपलब्धता के आधार पर वाहन भेजने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने का लक्ष्य है। यदि सरकारी एंबुलेंस तत्काल उपलब्ध नहीं होती है, तो निजी एंबुलेंस का विकल्प भी मिल सकता है। हालांकि, किस परिस्थिति में कौन-सी एंबुलेंस भेजी जाएगी और मरीज को विकल्प किस तरह दिया जाएगा, इसका अंतिम संचालन मॉडल अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी पढ़ें समस्तीपुर मुफस्सिल थाने पर 14 कांडों में जब्त 1 हजार 605 लीटर विदेशी शराब का हुआ विनष्टीकरण निजी एंबुलेंस का किराया तय करेगा स्वास्थ्य विभाग इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू निजी एंबुलेंस के किराये को नियंत्रित करना है। वर्तमान में निजी एंबुलेंस संचालक अपनी दरों के अनुसार मरीजों से किराया लेते हैं। आपातकालीन स्थिति में कई परिवारों को वाहन की जरूरत के कारण अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बिहार का स्वास्थ्य विभाग निजी एंबुलेंस का किराया प्रति किलोमीटर के आधार पर निर्धारित करने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य किराये में पारदर्शिता लाना और मरीजों के परिजनों से मनमाना शुल्क वसूले जाने की आशंका को कम करना है। निर्धारित दरों से अधिक शुल्क लेने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। हालांकि, प्रति किलोमीटर की अंतिम दरें, न्यूनतम किराया और अलग-अलग श्रेणी की एंबुलेंस के लिए शुल्क संबंधी नियमों की घोषणा अभी बाकी है। राज्यभर में निजी एंबुलेंस की होगी मैपिंग स्वास्थ्य विभाग की योजना के तहत राज्य में चलने वाली निजी एंबुलेंस की संख्या, उनके संचालन क्षेत्र और उपलब्धता से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। इस प्रक्रिया को एंबुलेंस मैपिंग कहा जाता है। मैपिंग पूरी होने के बाद प्रशासन को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस जिले, शहर या ग्रामीण क्षेत्र में कितनी निजी एंबुलेंस उपलब्ध हैं। इससे जरूरत के समय नजदीकी वाहन की पहचान करने और मरीज को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इस पहल से फायदा होने की उम्मीद है, जहां कई बार सरकारी एंबुलेंस की उपलब्धता सीमित होने या मांग बढ़ने से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। यह भी पढ़ें मुफस्सिल थाने की पुलिस ने पांच पियक्कड़ों को किया गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए सभीसाल 2026 के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग इस व्यवस्था को वर्ष 2026 के अंत तक चालू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए पहले निजी एंबुलेंस की मैपिंग, आपातकालीन कॉल सेंटर के साथ तकनीकी समन्वय और किराये से संबंधित नियमों को अंतिम रूप देना होगा। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के अनुसार, निजी एंबुलेंस को सरकारी नेटवर्क से जोड़ने से मरीजों को अधिक विकल्प मिल सकते हैं। इससे सरकारी और निजी सेवा प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने तथा मरीजों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना की वास्तविक शुरुआत और उसके बाद मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने पर ही स्पष्ट होगी। मरीजों और परिजनों को क्या फायदा हो सकता है? प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर एंबुलेंस की उपलब्धता बढ़ने, मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने और निजी एंबुलेंस के किराये में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। इसके अलावा, एक साझा नेटवर्क से आपातकालीन स्थिति में उपलब्ध वाहनों की जानकारी जुटाना आसान हो सकता है। फिलहाल मरीजों को यह ध्यान रखना चाहिए कि निजी एंबुलेंस को 102 और 112 सेवाओं से जोड़ने की योजना को लागू व्यवस्था न समझें। अंतिम नियम और सुविधा शुरू होने की तारीख की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक घोषणा से ही होगी। Post navigation पुलिस स्मृति दिवस पर समस्तीपुर पुलिस लाइन में शहीद पुलिसकर्मियों को किया गया नमन, दी गयी श्रद्धांजलि