Bihar : बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले को लेकर सवाल उठाने वाले बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह को वरिष्ठ IPS अधिकारी और बिहार STF के DG कुंदन कृष्णन की ओर से 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है। नोटिस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। इसके साथ ही कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। वहीं, सुधाकर सिंह ने जवाब देते हुए कहा है कि वह किसी दबाव में आकर अपने सवालों से पीछे नहीं हटेंगे। 5 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे की चेतावनी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, IPS कुंदन कृष्णन की ओर से उनके अधिवक्ता के माध्यम से 6 अक्टूबर 2026 को कानूनी नोटिस भेजा गया था। यह नोटिस भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की मौत और उससे जुड़ी पुलिस कार्रवाई पर सांसद सुधाकर सिंह की टिप्पणियों के संदर्भ में भेजा गया है। नोटिस में कथित बयानों को लेकर सार्वजनिक माफी की मांग की गई है। साथ ही, ऐसा नहीं करने पर 5 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे और अन्य कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। हालांकि, नोटिस भेजा जाना अपने आप में मानहानि के आरोपों को अदालत में साबित होना नहीं माना जाता है। सुधाकर सिंह ने कहा- सवाल उठाना जारी रखूंगा नोटिस की जानकारी सामने आने के बाद सुधाकर सिंह ने 15 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कानूनी नोटिस के जरिए उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती और वह किसी पद, वर्दी या सत्ता के दबाव में नहीं आएंगे। यह भी पढ़ें बिहार में हाईवे पेट्रोलिंग को मिली रफ्तार, 58 नए वाहन उतरे; हादसे के बाद गोल्डन आवर में मिलेगी मददसांसद के मुताबिक, उन्होंने भरत भूषण तिवारी की मौत और जमुई की एक अन्य घटना को लेकर जनहित में सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता के अधिकारों, न्याय और संविधान से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना उनकी जिम्मेदारी है। भरत भूषण तिवारी की मौत पर उठाए सवाल यह विवाद भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत हुई थी। घटना की परिस्थितियों और कार्रवाई की जिम्मेदारी को लेकर सुधाकर सिंह ने सवाल उठाए हैं। सांसद ने मांग की है कि मामले की जांच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निर्णय लेने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कार्रवाई के आदेश, पुलिस कमान और संबंधित अधिकारियों के बीच हुए संवाद की जांच की मांग भी उठाई है। ये सांसद की ओर से उठाए गए सवाल और आरोप हैं; इन्हें जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम सांसद सुधाकर सिंह ने अपने बयान में कहा कि भरत भूषण तिवारी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है, इसकी स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग दोहराई है। दूसरी ओर, कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में मानहानि का दावा किया गया है। अब इस विवाद में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की कानूनी कार्रवाई और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर निर्भर करेगी। यह भी पढ़ें बिहार में बसेंगे नए शहर! घर से लेकर सड़क और कनेक्टिविटी तक, एक्सपर्ट बनाएंगे पूरा प्लानबिहार में चर्चा में आया मामला भोजपुर एनकाउंटर से जुड़ा यह विवाद अब पुलिस की जवाबदेही, जनप्रतिनिधियों की टिप्पणियों और मानहानि कानून से जुड़े सवालों के कारण चर्चा में है। एक ओर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कानूनी नोटिस भेजा है, वहीं दूसरी ओर RJD सांसद ने अपने सवालों पर कायम रहने की बात कही है। फिलहाल, नोटिस और सांसद की प्रतिक्रिया के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कानूनी नोटिस किसी न्यायिक फैसले के समान नहीं होता। मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई और जांच से जुड़े आधिकारिक तथ्यों पर नजर रहेगी। Post navigation गोपालगंज में छात्रा की मौत पर बवाल, आरोपित के घर के सामने शव जलाया; इलाका पुलिस छावनी में तब्दील