नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली में जमानत मिल गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में दोनों पिछले सात दिनों से तिहाड़ जेल में बंद थे। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में सुनवाई के बाद दोनों के जमानतदारों के बॉन्ड स्वीकार कर लिए गए और उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।

इस मामले में पिछले कुछ दिनों से दोनों नेताओं की जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। इससे पहले जमानतदारों से जुड़े दस्तावेजों और उनकी पात्रता पर सवाल उठने के कारण उन्हें राहत नहीं मिल सकी थी। बुधवार को हुई सुनवाई के बाद इस मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया।

डेढ़ घंटे तक चली सुनवाई, फिर आया फैसला

सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। उनकी जमानत से संबंधित मामले पर करीब डेढ़ घंटे तक सुनवाई हुई।

इससे पहले दोनों की जमानत के लिए पेश किए गए जमानतदारों के दस्तावेजों और पहचान को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। पिछली कोशिशों में जमानतदारों से संबंधित समस्याओं के कारण उनकी रिहाई टल गई थी। बुधवार को अदालत ने जमानतदारों के बॉन्ड स्वीकार करते हुए दोनों की रिहाई का आदेश दिया।

जमानतदारों के दस्तावेजों के कारण अटकी थी रिहाई

मामले की पिछली सुनवाइयों के दौरान जमानतदारों की पहचान और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पहले पेश किए गए कुछ जमानतदारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। वहीं, बाद में पेश किए गए अन्य जमानतदारों के पहचान पत्र और दस्तावेजों में भी विसंगतियां बताई गई थीं।

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इन्हीं वजहों से अदालत में जमानत की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। इस घटनाक्रम को लेकर CJP की ओर से पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, जमानतदारों की स्वीकार्यता और कानूनी प्रक्रिया को लेकर अदालत के समक्ष अलग-अलग पक्षों की दलीलें रखी गईं।

क्या है सौरव दास और आशुतोष रांका का मामला?

यह पूरा मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, CJP के नेताओं और उनके समर्थकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया।

इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया और उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। बाद में दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसी कार्रवाई के बाद उनकी जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था?

प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, CJP के नेताओं और समर्थकों ने जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे। पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया और बिना अनुमति प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया।

दूसरी ओर, CJP के नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई और हिरासत को लेकर सवाल उठाए थे। मामले में दोनों पक्षों के दावों और कानूनी पहलुओं पर सुनवाई हुई। जमानत मिलने के बाद अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित तरीके से जारी रहेगी।

सात दिन बाद मिली राहत

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई का आदेश उनके परिवार, समर्थकों और पार्टी के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। दोनों नेताओं की जमानत प्रक्रिया कई चरणों से गुजरी, जिसमें जमानतदारों की पात्रता और दस्तावेजों को लेकर समस्याएं सामने आई थीं।

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बुधवार को अदालत द्वारा बॉन्ड स्वीकार किए जाने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले में लगाए गए आरोप समाप्त हो गए हैं। मामले से संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है।

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