Bihar Vidhan Parishad Recruitment: बिहार विधान परिषद में कर्मचारियों की बहाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका के बीच अब 43 नवनियुक्त कर्मियों की दक्षता की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया गया है। इसके लिए 18 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। परिषद सचिवालय की ओर से संबंधित अभ्यर्थियों को पत्र जारी कर निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला बिहार विधान परिषद में हुई 122 पदों पर नियुक्ति से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने के बाद सचिवालय ने चयनित कर्मियों की योग्यता और कार्यक्षमता की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है।

10 क्लर्क और 33 डाटा एंट्री ऑपरेटरों की होगी जांच

जानकारी के अनुसार, दोबारा स्किल टेस्ट के दायरे में 10 निम्नवर्गीय लिपिक (LDC) और 33 डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) शामिल हैं। इन सभी अभ्यर्थियों की हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग की व्यावहारिक दक्षता की जांच की जाएगी।

विधान परिषद के उप सचिव की ओर से जारी पत्र में सभी चयनित अभ्यर्थियों को 18 नवंबर को परिषद सचिवालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इस परीक्षा में शामिल होना सभी संबंधित कर्मियों के लिए अनिवार्य होगा। यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित तिथि पर अनुपस्थित रहता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

अभ्यर्थियों को परीक्षा की जानकारी उनके आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर और ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जाएगी।

पहले भी रोका गया था कर्मियों का कार्यालय में प्रवेश

इससे पहले बिहार विधान परिषद सचिवालय ने नवनियुक्त कर्मियों के कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। अचानक लिए गए इस फैसले से कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।

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बताया गया कि प्रभावित चयनित कर्मियों में 10 निम्नवर्गीय लिपिक, 7 आशुलिपिक, 33 डाटा एंट्री ऑपरेटर, 14 सुरक्षाकर्मी और 15 कार्यालय परिचारी शामिल थे। कार्यालय में प्रवेश रोके जाने के बाद कई कर्मचारी परिषद परिसर में बने पार्क और पार्किंग क्षेत्र में बैठे रहे थे।

नवनियुक्त कर्मियों के अनुसार, उनकी ज्वाइनिंग 10 सितंबर 2026 को कराई गई थी। इसके बाद वे नियमित रूप से कार्यालय पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। हालांकि, अचानक प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद उनकी नौकरी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

निजी सहायकों की परीक्षा में भी सामने आया था मामला

बिहार विधान परिषद में सात निजी सहायकों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठे थे। इन चयनित अभ्यर्थियों को दोबारा शॉर्टहैंड टेस्ट के लिए बुलाया गया था, लेकिन 4 नवंबर को आयोजित परीक्षा में कोई भी अभ्यर्थी शामिल नहीं हुआ।

इसके बाद परिषद सचिवालय ने उन्हें 18 नवंबर को दोबारा परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने का फैसला किया। इस परीक्षा में भी अनुपस्थित रहने पर उनकी उम्मीदवारी समाप्त किए जाने की बात कही गई है।

कार्यकारी सभापति ने क्या कहा?

इस पूरे मामले पर बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय ने कहा कि अभ्यर्थियों को लेकर परिषद सकारात्मक है। कार्यरत कर्मियों के वेतन भुगतान के लिए सरकार को बजट प्रस्ताव भेजा गया है और इसके लिए राशि भी प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि जिन पदों पर कर्मियों की नियुक्ति हुई है, उनसे संबंधित कार्यों को सही तरीके से करने की योग्यता की जांच जरूरी है। इस मामले की जांच के लिए विधान परिषद सचिवालय की ओर से एक आंतरिक कमेटी भी गठित की गई है।

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फिलहाल 18 नवंबर को होने वाली दोबारा दक्षता जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस परीक्षा के बाद ही संबंधित कर्मियों की योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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