Samastipur Cyber Crime: समस्तीपुर जिले में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों में दो लोगों से कुल 6.51 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने अलग-अलग तरीके अपनाकर पीड़ितों को अपने जाल में फंसाया। एक मामले में धमकी देकर रुपये वसूले गए, जबकि दूसरे मामले में मदद के नाम पर ठगी की गई। घटना के बाद पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की है।

धमकी देकर साइबर ठगी का आरोप

पहले मामले में साइबर अपराधियों ने पीड़ित को कथित तौर पर धमकी और दबाव में लेकर पैसे ट्रांसफर करवाए। अपराधियों ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं, जिससे पीड़ित डर गया और उनके बताए तरीके से रुपये भेजता चला गया। बाद में जब उसे ठगी का एहसास हुआ तो उसने मामले की जानकारी पुलिस को दी।

साइबर अपराधियों द्वारा डर और दबाव का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे ऐंठने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में अपराधी फोन कॉल, मैसेज या अन्य ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क कर पीड़ित को मानसिक दबाव में लेने की कोशिश करते हैं।

मदद के नाम पर भी बनाया शिकार

दूसरे मामले में साइबर अपराधियों ने मदद करने के नाम पर एक व्यक्ति को अपने झांसे में लिया। बातचीत के दौरान अपराधियों ने भरोसा कायम किया और इसके बाद अलग-अलग तरीके से रुपये ट्रांसफर करा लिए। जब पीड़ित को अपने साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी हुई, तब तक उसके खाते से बड़ी रकम निकल चुकी थी।

दोनों मामलों को मिलाकर पीड़ितों से करीब 6.51 लाख रुपये की साइबर ठगी होने की बात सामने आई है।

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शिकायत के बाद जांच में जुटी पुलिस

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामलों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटा रही है। इसके आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

साइबर अपराध के मामलों में समय पर शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ठगी का पता चलते ही पीड़ित को बैंक और संबंधित साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचना देनी चाहिए, ताकि संदिग्ध लेनदेन पर जल्द कार्रवाई की संभावना बनी रहे।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

लगातार बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड को देखते हुए लोगों को अनजान फोन कॉल, लिंक, मैसेज और ऑनलाइन भुगतान के मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति के कहने पर OTP, UPI PIN, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। मदद या धमकी के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों की पहचान और सत्यापन किए बिना कोई भुगतान नहीं करना चाहिए।

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