Samastipur News: बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई देने लगा है। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार शुरू कर दिया है। समस्तीपुर सदर अस्पताल में भी शुक्रवार को ओपीडी सेवा प्रभावित रही। इलाज के लिए सुबह से अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा।

सहरसा में डॉक्टरों पर कार्रवाई के विरोध में आंदोलन

डॉक्टरों के संगठन के अनुसार, आंदोलन की मुख्य वजह सहरसा सदर अस्पताल में चिकित्सकों के खिलाफ हुई कार्रवाई है। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे एकतरफा बताया है। संगठन का कहना है कि संबंधित मामले में चिकित्सकों का पक्ष भी उचित तरीके से सुना जाना चाहिए था।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से 23 सितंबर को सहरसा सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार आजाद और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोशन लाल को तत्काल प्रभाव से स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में योगदान करने का आदेश जारी किया गया था।

समस्तीपुर सदर अस्पताल की OPD रही ठप

शुक्रवार सुबह समस्तीपुर सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को ओपीडी बंद रहने की जानकारी मिली। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से बस और दूसरे साधनों से अस्पताल पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी हुई। ओपीडी के बाहर मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के कारण सामान्य ओपीडी में इलाज नहीं हो सका।

कई मरीजों का कहना था कि अस्पताल तक पहुंचने में समय और पैसा खर्च होने के बाद भी इलाज नहीं हो पाने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों ने हड़ताल की स्थिति में वैकल्पिक चिकित्सकीय व्यवस्था किए जाने की मांग भी की।

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इमरजेंसी सेवा को आंदोलन से अलग रखा गया

डॉक्टरों के आंदोलन के बावजूद आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को चालू रखने की बात सामने आई है। समस्तीपुर सदर अस्पताल में भी इमरजेंसी सेवा जारी रखने का प्रयास किया गया, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।

हालांकि सामान्य बीमारी, जांच, परामर्श और नियमित उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को ओपीडी बंद रहने के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।

कई जिलों में दिखा आंदोलन का असर

डॉक्टरों के ओपीडी बहिष्कार का असर बिहार के दूसरे जिलों में भी देखने को मिला है। रिपोर्टों के अनुसार मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी समेत कई स्थानों पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुईं। कई जगह दूर-दराज से पहुंचे मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा, जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गईं।

मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी

सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अनिश्चितकालीन बहिष्कार जारी रहने पर सामान्य मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल इलाज का प्रमुख माध्यम हैं।

वहीं, डॉक्टरों का संगठन अपनी मांगों और सहरसा मामले में की गई कार्रवाई को लेकर आंदोलन पर कायम है। अब स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सक संगठन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकलने पर मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्थिति पर नजर

फिलहाल समस्तीपुर समेत बिहार के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा पर आंदोलन का असर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी निर्देशों और डॉक्टरों के संगठन के अगले फैसले के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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मरीजों के लिए अस्पताल जाने से पहले संबंधित अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। गंभीर स्थिति में उपलब्ध आपातकालीन सेवा का उपयोग किया जा सकता है।

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