नई दिल्ली: दिल्ली में छह मंजिला इमारत गिरने की घटना ने पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। घटना के समय इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। बताया जा रहा है कि यह इमारत करीब 50 साल पुरानी और जर्जर हालत में थी। दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास होने के कारण इस इलाके में छात्रों के लिए पीजी और हॉस्टल की काफी मांग है। इसी वजह से पुरानी इमारत को दोबारा तैयार कर हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। हॉस्टल में बदली गई थी पुरानी इमारत इमारत का नाम Hostel Daze बताया जा रहा है। इसमें करीब 30 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्रों को रखने की योजना थी। अगस्त में यहां छात्रों का रहना शुरू हो गया था, लेकिन इमारत में निर्माण और मरम्मत का काम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना दिल दहला देने वाली है। वहां रहने वाले अधिकतर छात्र थे और उनके दबे होने की खबर से मन विचलित है।मैं स्वयं हरियाणा व दिल्ली विश्वविद्यालय की NSUI टीम के साथियों के संग मौके पर हूँ। @nsui के साथी, DU के… pic.twitter.com/IpfeV9JdvT— Deepender Singh Hooda (@DeependerSHooda) September 6, 2026 हादसे के समय भी कुछ मजदूर बेसमेंट में काम कर रहे थे। राहत और बचाव अभियान के दौरान मजदूरों को भी बाहर निकाला गया, हालांकि एक मजदूर की हादसे में मौत हो गई। यह भी पढ़ें समस्तीपुर में पीएम सूर्य घर योजना में लापरवाही पर बैंक शाखाओं पर कार्रवाई की तैयारीबारिश के बीच बेसमेंट में चल रहा था काम दिल्ली में लगातार हुई बारिश के कारण आसपास के इलाके में जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे वाली इमारत के बेसमेंट में भी पानी जमा था। इसके बावजूद वहां निर्माण कार्य जारी था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में कई पुराने मकानों को पीजी और हॉस्टल में बदला जा रहा है। कुछ मकानों में पांच से छह मंजिल तक निर्माण किए जाने की भी बात सामने आई है। बेसमेंट की दीवार हटाने की भी बात सामने आई स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे से पहले बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था और एक दीवार हटाने का काम भी किया जा रहा था। हालांकि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। हादसे के बाद जांच शुरू घटना के बाद प्रशासन और राहत-बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। इमारत के मालिक के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। हादसे ने पुराने भवनों को पीजी या हॉस्टल में बदलने और उनकी सुरक्षा जांच को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि पुराने और जर्जर भवनों में निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने से पहले उनकी सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती की जांच बेहद जरूरी है। Post navigation बिहार में शिक्षकों की ₹15 हजार तक बढ़ सकती है सैलरी! 7वें वेतनमान की मांग तेज, जानिए क्या-क्या मिल सकता है फायदा